सती का जन्म और पुनर्जन्म

- पहले भगवान शिव की पत्नी सती थीं।
- सती के पिता हिमालय (हिमवान) और माता मेणका थीं।
- सती के पिता ने शिव के प्रति असम्मान किया, जिससे सती ने अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया।
- इसके बाद, सती का पुनर्जन्म माता पार्वती के रूप में हुआ।
2️⃣ पार्वती की तपस्या
- माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या और साधना की।
- उन्होंने पर्वतों पर कई वर्षों तक ध्यान और ध्यान साधना की।
- उनकी भक्ति और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी जीवनसंगीनी स्वीकार किया।
3️⃣ भगवान शिव का विवाह
- माता पार्वती के निवेदन और तपस्या से भगवान शिव ने विवाह के लिए सहमति दी।
- गणपति और कार्तिकेय के जन्म से पहले ही यह विवाह हुआ।
- विवाह के समय सभी देवता और ऋषि-मुनि उपस्थित थे।
- यह विवाह कैलाश पर्वत पर आयोजित हुआ।
- विवाह में भगवान ब्रह्मा और विष्णु ने भी शिरकत की।
4️⃣ शिव–पार्वती का महत्व
- यह विवाह शक्ति और शिव की एकता का प्रतीक है।
- शिव–पार्वती का मेल सृष्टि, पालन और संहार के चक्र को बनाए रखने वाला माना गया।
- यह कथा भक्तों को धैर्य, भक्ति और प्रेम की शिक्षा देती है।
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